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Service Book…

  1. सेवा अभिलेख कर्मचारी के राजकीय जीवन का क्रमबद्ध ब्यौरा है जिसमें कर्मचारी से संबंधित समस्त सूचनाओं का उल्लेख किया जाना चाहिए।
    सेवा पुस्तिका में निर्धारित स्थान पर नोमिनी फ़ोर्म (GA 126) चस्पा करना चाहिए …
    वैसे आजकल ये फ़ोर्म सेवा पुस्तिका में ही प्रिन्टेड आता है
  2. विभाग के सभी आधिकारी/कर्मचारियों की अलग-अलग सेवा पुस्तिकाएं संधारित की जाती है (जीए 46), चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए सर्विस रोल संधारित की जाती है।
    ( आर एस आर 160 से 164)
  3. संबंधित कार्यालय अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक कर्मचारी को सेवा पुस्तिका का प्रतिवर्ष अवलोकन कराया जाकर उसके हस्ताक्षर लिए जाने चाहिए। ( नियम 162 )
  4. सेवा अभिलेख की अनुपलब्धता अथवा अपूर्णता की स्थिति में वेतन निर्धारण और पेंशन के मामले अनिर्णित रह जाते हैं अतः राज्य सरकार के निर्देशानुसार 2 ₹ प्रति पेज के हिसाब से सेवा पुस्तिका की सत्यापित प्रति कार्मिक को उपलब्ध करानी चाहिए
  5. प्रत्येक कर्मचारी की सेवाएं प्रतिवर्ष 1 अप्रैल को कार्यालय अध्यक्ष द्वारा सत्यापित की जानी चाहिए। प्रमाणीकरण पर क्रमांक अंकित किए जाने चाहिए। राजपत्रित अधिकारी जो कार्यालय अध्यक्ष है उन्हें जी ए 141 संधारित कर सेवा सत्यापन हेतु उच्च अधिकारियों को भिजवाया जाना चाहिए।
  6. कर्मचारी के राजकीय सेवा में आते ही यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि सेवा पुस्तिका बन गई है इस पुस्तिका में जो विवरण दर्ज किया गया है वे उसके पास उपलब्ध सूचनाओं से पूर्ण मेल खाते हैं।
  7. स्थानांतरण की स्थिति में राज्य कर्मचारी की सेवा पुस्तिका हर दृष्टि से पूर्ण की जाकर नए पद स्थापित स्थान पर एक माह के अंदर अति आवश्यक रूप से भिजवा दी जानी चाहिए।
  8. सेवा पुस्तिका में महत्वपूर्ण बातें जिनका अति आवश्यक रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए जैसे प्रति वर्ष की गई सेवाओं का सत्यापन, वार्षिक वेतन वृद्धि, अवकाश लेखा, समर्पित अवकाश, वेतन स्थिरीकरण, दीर्घकालीन ऋण आदि।
  9. मूल सेवा पुस्तिका उपलब्ध नहीं होने पर डुप्लीकेट सेवा पुस्तिका के आधार पर वेतन वृद्धि, वेतन स्थिरीकरण, अवकाश स्वीकृति तथा पेंशन आदि स्वीकृति की जा सकती है परंतु शर्त यह है कि ऐसा करने से पूर्व संबंधित कर्मचारी से एक वचन पत्र लिया जाना चाहिए कि मूल सेवा पुस्तिका मिल जाने पर यदि उसके आधार पर अधिक भुगतान किया जाना सिद्ध हो जावे तो उसे कर्मचारी द्वारा वापस लौटाना होगा।

सेवा पुस्तिका से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु👇

सेवा अभिलेख संधारण में सेवा पुस्तिका महत्वपूर्ण दस्तावेज है राजस्थान सेवा नियम 160 के अनुसार प्रत्येक कार्मिक की सेवा पुस्तिका नियुक्ति तिथि से बनाई जाती है। सभी कॉलम स्थाई व सही भरे जाने चाहिए। किसी तरह की कोई काट छांट व अपरलेखन नहीं किया जाना चाहिए।

सेवा पुस्तिका में प्रविष्ठियां, नाम, पद,स्थान, जन्म तिथि प्रमाणित होने चाहिए पिता/ पति का नाम, योग्यता सेवा में रहते हुए प्राप्त योग्यता (शैक्षणिक व प्रशिक्षण), ऊंचाई, पहचान चिन्ह अंगूठे और अंगुलियों के निशान, हस्ताक्षर आदि का प्रमाणीकरण होना चाहिए।

सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्म तिथि को वित्त विभाग की बिना अनुमति के परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

पद, स्थान, नियुक्ति, मूल वेतन/ श्रंखला, अतिरिक्त वेतन, अन्य परिलाभ, वेतन वृद्धि पदोन्नति तिथि, सेवा सत्यापन प्रतिवर्ष अंकित किए जाने चाहिए ( gf&ar 66 के संदर्भ में वेतन बिलों के आधार पर सेवा सत्यापन किया जाना चाहिए)

सेवा अभिलेख में सेवाकाल में गतिरोध, निलंबन की प्रविष्टि अति आवश्यक रूप से की जानी चाहिए। सेवा पुस्तिका में अवकाश लेखा की क्रमबद्ध प्रविष्टि की जानी चाहिए, उपार्जित अवकाश, अर्द्ध वेतन अवकाश, परिवर्तित अवकाश अंकित किया जाना चाहिए।

*अवैतनिक अवकाश लाल स्याही से अंकित किए जाने चाहिए। सेवा पुस्तिका में विपरीत प्रविष्टियों को यथा निलंबन, दंड आदि को लाल स्याही से अंकित किया जाना चाहिए। समर्पित अवकाश का इन्द्राज भी लाल स्याही से करना चाहिए

व्यक्तिगत पंजिका👇

यह पंजिका भी सेवा अभिलेख का महत्वपूर्ण अंग है इस पंजिका में नियुक्ति से संबंधित समस्त आदेश, प्रमाण पत्र, समस्त पत्र व्यक्तिगत पंजिका में व्यवस्थित क्रमांक सहित संधारित किए जाने चाहिए। जहां सेवा पुस्तिका किन्ही कारणों से उपलब्ध नहीं हो पाती वहां व्यक्तिगत पंजिका प्रकरणों के निस्तारण के लिए आधार मानी जाती है।

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